Ramagya
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شنی دیو آرتی

Shani

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय जय श्री शनिदेव॥ श्याम अंग वक्र दृष्टि चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धारण किये गिद्ध की सवारी॥ जय जय श्री शनिदेव॥ क्रोण में स्थापित प्रभु कुम्भ में विराजे। मकर में उच्च प्रभु तुला में बिराजे॥ जय जय श्री शनिदेव॥ दैत्यकुल संहार किया देवों का कारज। शनिदेव महाराज की जय हो जय हो॥ जय जय श्री शनिदेव॥ परम पूज्य सूर्यपुत्र गंगा जी के तीरे। बैठे शनिराज कहाँ शिंगणापुर बीरे॥ जय जय श्री शनिदेव॥ उँगली में नीला रत्न शोभा अति प्यारी। करत कृपा जन ऊपर शनिदेव भारी॥ जय जय श्री शनिदेव॥ पैर में कड़ा है शोभित कर में है त्रिशूला। करत कृपा भक्तन पर दूर करें शूला॥ जय जय श्री शनिदेव॥ साढ़ेसाती से रक्षा करो महाराजा। नजर तेरी जिस पर पड़े होय वो काजा॥ जय जय श्री शनिदेव॥ शनिदेव की आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ जय जय श्री शनिदेव॥

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