अभिमन्यु और चक्रव्यूह
अभिमन्यु
अभिमन्यु अर्जुन और सुभद्रा का वीर पुत्र था। जब वह अपनी माँ के गर्भ में था, तभी उसने अर्जुन को चक्रव्यूह में प्रवेश करने की विधि बताते सुना था। परंतु जब अर्जुन बाहर निकलने की विधि बता रहे थे, तब सुभद्रा सो गईं और अभिमन्यु ने वह भाग नहीं सुना। महाभारत युद्ध के तेरहवें दिन कौरवों ने चक्रव्यूह रचा। यह एक घूमती हुई सैन्य रचना थी जिसे भेदना लगभग असंभव था। अर्जुन युद्धभूमि के दूसरे छोर पर व्यस्त थे। केवल अभिमन्यु को चक्रव्यूह में प्रवेश करना आता था। सोलह वर्षीय अभिमन्यु ने निडरता से चक्रव्यूह में प्रवेश किया। अभिमन्यु ने अकेले ही कौरव सेना के महान योद्धाओं को परास्त किया। परंतु जयद्रथ ने पांडव सेना को अंदर आने से रोक दिया। अभिमन्यु अकेला फँस गया। कौरवों के छह महारथियों ने मिलकर युद्ध के नियमों को तोड़ते हुए अकेले अभिमन्यु पर आक्रमण किया। अभिमन्यु ने अंतिम साँस तक वीरता से लड़ा लेकिन अंततः वीरगति को प्राप्त हुआ। उसकी वीरता आज भी अद्वितीय मानी जाती है।
सीख
अधूरा ज्ञान खतरनाक हो सकता है — हमेशा पूरा सीखो।