Ramagya
🐘

अंधे और हाथी

लोककथा

एक गाँव में छह अंधे आदमी रहते थे। उन्होंने हाथी के बारे में बहुत सुना था लेकिन कभी हाथी को छुआ नहीं था। एक दिन गाँव में एक हाथी आया। सभी अंधे आदमी हाथी को छूकर जानना चाहते थे कि हाथी कैसा होता है। पहले आदमी ने हाथी की सूँड छुई और बोला कि हाथी साँप जैसा होता है। दूसरे ने कान छुआ और कहा कि हाथी पंखे जैसा है। तीसरे ने पैर छुआ और बोला कि हाथी पेड़ के तने जैसा है। चौथे ने पेट छुआ और कहा कि हाथी दीवार जैसा है। पाँचवें ने पूँछ छुई और बोला कि हाथी रस्सी जैसा है। छठे ने दाँत छुआ और कहा कि हाथी भाले जैसा है। सभी आपस में लड़ने लगे कि मैं सही हूँ और तुम गलत हो। तभी एक बुद्धिमान व्यक्ति आया और बोला कि तुम सब सही हो और सब गलत भी हो। तुम में से हर एक ने हाथी का एक हिस्सा छुआ है। पूरा हाथी इन सबसे मिलकर बना है। अगर तुम सब मिलकर अपने अनुभव बाँटो तो पूरी तस्वीर समझ आएगी।

सीख

हर व्यक्ति का दृष्टिकोण अलग होता है — पूरी सच्चाई जानने के लिए सबकी बात सुनो।