दुर्गा और महिषासुर
दुर्गा
महिषासुर एक भयंकर राक्षस था जिसने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया कि कोई भी देवता या मनुष्य उसे नहीं मार सकता। इस वरदान के बल पर उसने स्वर्ग पर आक्रमण किया और देवताओं को हरा दिया। सभी देवता भयभीत होकर भगवान विष्णु और शिव के पास गए। तब सभी देवताओं की शक्तियाँ मिलकर एक दिव्य स्त्री शक्ति का निर्माण हुआ — माँ दुर्गा। शिव ने त्रिशूल दिया, विष्णु ने चक्र, इंद्र ने वज्र, और हर देवता ने अपना-अपना अस्त्र दिया। हिमालय ने सवारी के लिए सिंह दिया। माँ दुर्गा दस भुजाओं वाली, अत्यंत तेजस्वी देवी के रूप में प्रकट हुईं। माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक भयंकर युद्ध हुआ। महिषासुर ने अनेक रूप बदले — कभी भैंसा बना, कभी सिंह, कभी हाथी। लेकिन माँ दुर्गा ने हर रूप को परास्त किया। दसवें दिन माँ दुर्गा ने अपने त्रिशूल से महिषासुर का वध किया। इसी विजय की स्मृति में नवरात्रि और दशहरा का त्योहार मनाया जाता है।
सीख
बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली हो, शक्ति और साहस से उसे हराया जा सकता है।