Ramagya
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किसान और साँप

लोककथा

सर्दियों की एक ठंडी सुबह एक दयालु किसान अपने खेत में जा रहा था। रास्ते में उसने एक साँप को ठंड से अकड़ा हुआ पड़ा देखा। साँप इतना ठंडा हो गया था कि हिल भी नहीं पा रहा था। किसान को उस पर दया आ गई। किसान ने साँप को उठाया और अपनी छाती से लगा लिया ताकि उसे गर्मी मिले। किसान की गर्मी से साँप धीरे-धीरे जागने लगा। उसके शरीर में जान आ गई। लेकिन जैसे ही साँप पूरी तरह होश में आया, उसने किसान को डस लिया। किसान दर्द से चिल्लाया और साँप को नीचे फेंक दिया। उसने साँप से पूछा कि मैंने तुम्हारी जान बचाई और तुमने मुझे काट लिया। साँप ने कहा कि तुम जानते थे कि मैं साँप हूँ, काटना मेरा स्वभाव है। किसान को अपनी गलती समझ आई कि उसने बिना सोचे-समझे एक खतरनाक प्राणी पर भरोसा किया। सौभाग्य से गाँव वालों ने समय पर किसान का इलाज कर दिया।

सीख

दया करो लेकिन किस पर कर रहे हो यह समझदारी से सोचो।

किसान और साँप | Ramagya Astrology