गणेश जी को हाथी का सिर कैसे मिला
गणेश
बहुत समय पहले की बात है। माता पार्वती कैलाश पर्वत पर अकेली रहती थीं क्योंकि भगवान शिव ध्यान करने गए थे। एक दिन पार्वती जी ने चंदन के लेप से एक सुंदर बालक बनाया और उसमें प्राण डाल दिए। उन्होंने उस बालक का नाम गणेश रखा। पार्वती जी ने गणेश से कहा कि वे स्नान करने जा रही हैं और किसी को भी अंदर न आने दें। गणेश दरवाजे पर पहरा देने लगे। तभी भगवान शिव वापस आए। गणेश ने उन्हें रोक दिया क्योंकि वे शिव जी को पहचानते नहीं थे। शिव जी क्रोधित हो गए और उन्होंने गणेश का सिर काट दिया। जब पार्वती जी को पता चला तो वे बहुत दुखी हुईं। शिव जी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने अपने सेवकों को कहा कि जो पहला प्राणी मिले उसका सिर ले आओ। सेवकों को सबसे पहले एक हाथी मिला। शिव जी ने हाथी का सिर गणेश के धड़ पर लगा दिया और उन्हें जीवित कर दिया। शिव जी ने गणेश को वरदान दिया कि हर शुभ काम में सबसे पहले उनकी पूजा होगी।
सीख
अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करना सबसे बड़ा कर्तव्य है।