Ramagya
🏞️

गंगा का पृथ्वी पर आगमन

शिव

राजा सगर के साठ हज़ार पुत्रों को कपिल मुनि के श्राप से भस्म कर दिया गया था। उनकी आत्माओं को मुक्ति तभी मिल सकती थी जब गंगा नदी का पवित्र जल उनकी राख पर बहे। लेकिन गंगा तो स्वर्ग में बहती थीं। पीढ़ी दर पीढ़ी राजाओं ने गंगा को पृथ्वी पर लाने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुए। अंततः राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या की। ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए और गंगा को पृथ्वी पर भेजने को तैयार हुए। लेकिन एक समस्या थी — गंगा का वेग इतना प्रचंड था कि यदि वे सीधे पृथ्वी पर गिरतीं तो पृथ्वी टूट जाती। भगीरथ ने भगवान शिव से प्रार्थना की। शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया। गंगा को घमंड था कि वे शिव को भी बहा ले जाएँगी। लेकिन शिव की जटाओं में गंगा उलझ गईं और उनका वेग शांत हो गया। फिर शिव ने धीरे-धीरे गंगा को अपनी जटाओं से पृथ्वी पर छोड़ा। भगीरथ गंगा को राजा सगर के पुत्रों की राख तक ले गए। गंगा के स्पर्श से सभी आत्माओं को मुक्ति मिली। भगीरथ के प्रयास के कारण गंगा को भागीरथी भी कहा जाता है।

सीख

पीढ़ियों की मेहनत और दृढ़ संकल्प से असंभव कार्य भी पूरे होते हैं।

गंगा का पृथ्वी पर आगमन | Ramagya Astrology