हनुमान की लंका यात्रा
हनुमान
सीता माता की खोज में वानर सेना समुद्र के किनारे पहुँची। विशाल समुद्र के पार लंका थी जहाँ रावण ने सीता को बंदी बनाकर रखा था। कोई भी वानर इतना बड़ा समुद्र पार करने में सक्षम नहीं था। तभी जाम्बवान ने हनुमान को उनकी असीम शक्तियों का स्मरण कराया। हनुमान को अपनी शक्ति याद आई। उन्होंने अपना शरीर विशाल किया और एक पर्वत की चोटी से छलांग लगाई। उनकी छलांग इतनी शक्तिशाली थी कि पर्वत धरती में धँस गया। रास्ते में सुरसा नामक राक्षसी ने उन्हें रोका और कहा कि उसके मुँह में प्रवेश किए बिना कोई आगे नहीं जा सकता। हनुमान ने चतुराई दिखाई — पहले बहुत बड़े हुए, फिर अचानक बहुत छोटे होकर सुरसा के मुँह में जाकर तुरंत बाहर आ गए। लंका पहुँचकर हनुमान ने छोटा रूप धारण किया और रात के अँधेरे में सीता की खोज शुरू की। अशोक वाटिका में उन्होंने सीता माता को पाया जो राम का नाम जपते हुए बैठी थीं। हनुमान ने उन्हें राम की अँगूठी दी और सीता ने अपनी चूड़ामणि हनुमान को दी। हनुमान ने सीता को आश्वासन दिया कि राम शीघ्र ही उन्हें मुक्त कराएँगे।
सीख
अपनी छिपी शक्तियों को पहचानो और असंभव को संभव बनाओ।