Ramagya
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कृष्ण ने गोवर्धन उठाया

कृष्ण

वृंदावन के लोग हर साल देवराज इंद्र की पूजा करते थे ताकि अच्छी बारिश हो और फसलें अच्छी उगें। एक बार बालक कृष्ण ने सबसे कहा कि हमें इंद्र की नहीं बल्कि गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि वही हमारी गायों को घास देता है और हमारी रक्षा करता है। गाँव वालों ने कृष्ण की बात मानी। इंद्र को बहुत क्रोध आया। उन्होंने भयंकर तूफान और मूसलाधार बारिश भेजी। बिजली कड़कने लगी, हवाएँ तेज़ चलने लगीं। पूरा वृंदावन डूबने लगा। सब लोग डरकर कृष्ण के पास आए। कृष्ण ने मुस्कुराते हुए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठा लिया जैसे कोई छतरी उठाता है। सारे गाँव वाले अपनी गायों और जानवरों के साथ पर्वत के नीचे आ गए। सात दिन और सात रात तक कृष्ण ने पर्वत उठाए रखा। अंत में इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने बारिश रोकी और कृष्ण से क्षमा माँगी। तब से इंद्र ने कृष्ण की महिमा को स्वीकार किया।

सीख

घमंड करने वाले को एक दिन झुकना ही पड़ता है।