Ramagya
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कृष्ण और पूतना

कृष्ण

जब कृष्ण का जन्म हुआ तो कंस को भविष्यवाणी का बहुत डर था कि देवकी का आठवाँ पुत्र उसका वध करेगा। कंस ने पूतना नामक एक राक्षसी को भेजा। पूतना का काम था गोकुल के सभी नवजात शिशुओं को मारना। पूतना ने एक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया और गोकुल पहुँची। उसने अपने स्तनों पर विष लगाया था। वह यशोदा के घर गई और बोली कि वह इस सुंदर बालक को दूध पिलाना चाहती है। यशोदा ने भोलेपन से कृष्ण को पूतना की गोद में दे दिया। पूतना ने कृष्ण को दूध पिलाना शुरू किया। लेकिन कृष्ण ने इतनी शक्ति से दूध पीना शुरू किया कि पूतना के प्राण ही खींच लिए। पूतना चीखने लगी और उसका असली भयानक राक्षसी रूप प्रकट हो गया। वह धरती पर गिर पड़ी और मर गई। उसका विशाल शरीर कई पेड़ों को तोड़ता हुआ गिरा। नन्हे कृष्ण उसके शरीर पर खेल रहे थे। गाँव वालों ने दौड़कर कृष्ण को उठाया। सबको आश्चर्य हुआ कि इतने छोटे बालक ने इतनी बड़ी राक्षसी को कैसे मार दिया।

सीख

बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली हो, अच्छाई हमेशा जीतती है।

कृष्ण और पूतना | Ramagya Astrology