कृष्ण का विश्वरूप
कृष्ण
महाभारत का युद्ध आरंभ होने वाला था। कुरुक्षेत्र के मैदान में दोनों सेनाएँ आमने-सामने खड़ी थीं। अर्जुन ने जब देखा कि सामने उनके अपने दादा भीष्म, गुरु द्रोण, भाई और रिश्तेदार खड़े हैं, तो उनके हाथ से गांडीव धनुष गिर गया। उन्होंने कृष्ण से कहा कि वे अपनों को मारकर राज्य नहीं चाहते। तब भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। उन्होंने कर्म, धर्म और आत्मा के बारे में समझाया। कृष्ण ने कहा कि आत्मा अमर है — न जन्मती है, न मरती है। क्षत्रिय का धर्म युद्ध करना है और अधर्म के विरुद्ध लड़ना कर्तव्य है। जब अर्जुन ने कृष्ण से उनका असली रूप दिखाने की प्रार्थना की, तो कृष्ण ने अपना विश्वरूप प्रकट किया। अर्जुन ने देखा कि कृष्ण के शरीर में संपूर्ण ब्रह्मांड समाया हुआ है — सभी देवता, सभी प्राणी, सभी लोक, सृष्टि और विनाश सब एक साथ। यह दृश्य इतना भव्य और भयंकर था कि अर्जुन काँपने लगे। उन्होंने हाथ जोड़कर कृष्ण की स्तुति की और अपना कर्तव्य निभाने का संकल्प लिया।
सीख
अपने कर्तव्य से कभी मुँह नहीं मोड़ना चाहिए।