लक्ष्मण रेखा
राम
वनवास के समय राम, सीता और लक्ष्मण पंचवटी में रहते थे। जब राम सुनहरे हिरण के पीछे गए और काफी देर तक नहीं लौटे, तो सीता को चिंता हुई। उन्होंने लक्ष्मण से राम की खोज में जाने को कहा। लक्ष्मण ने पहले मना किया क्योंकि राम ने उन्हें सीता की रक्षा का दायित्व दिया था। परंतु सीता के बार-बार आग्रह करने पर लक्ष्मण को जाना पड़ा। जाने से पहले लक्ष्मण ने कुटिया के चारों ओर एक रेखा खींची। उन्होंने सीता से कहा कि यह रेखा उनकी रक्षा करेगी और किसी भी परिस्थिति में इसे पार न करें। कोई भी बुरी शक्ति इस रेखा को पार नहीं कर सकती। लक्ष्मण के जाते ही रावण एक साधु का भेष बनाकर आया। उसने भिक्षा माँगी। सीता ने रेखा के अंदर से ही भिक्षा देनी चाही, परंतु रावण ने चतुराई से सीता को रेखा के बाहर आने पर विवश कर दिया। जैसे ही सीता ने रेखा पार की, रावण ने अपना असली रूप दिखाया और उनका अपहरण कर लिया। यह कथा हमें सिखाती है कि सुरक्षा की सीमाओं का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है।
सीख
सुरक्षा की सीमाओं का पालन करना बुद्धिमानी है।