Ramagya
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मत्स्य अवतार

विष्णु

बहुत पुराने समय की बात है। एक दिन राजा मनु नदी में स्नान कर रहे थे। उनकी हथेली में एक छोटी सी मछली आ गई। मछली ने कहा कि मुझे बचाओ, बड़ी मछलियाँ मुझे खा जाएँगी। दयालु मनु ने उसे एक बर्तन में रख दिया। अगले दिन मछली बर्तन से बड़ी हो गई। मनु ने उसे तालाब में डाला, फिर नदी में, फिर समुद्र में — लेकिन मछली बढ़ती ही गई। तब मनु समझ गए कि यह कोई साधारण मछली नहीं है। मछली ने अपना असली रूप दिखाया — वह भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार था। मत्स्य भगवान ने मनु को बताया कि सात दिन बाद प्रलय आएगी और पूरी पृथ्वी जल में डूब जाएगी। उन्होंने मनु को एक विशाल नाव बनाने और उसमें सभी प्रकार के बीज, पौधे और प्राणियों के जोड़े रखने को कहा। जब प्रलय आई तो मत्स्य भगवान ने अपने सींग से नाव को बाँधकर सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया। इस प्रकार मनु ने सृष्टि को बचाया और प्रलय के बाद नई दुनिया की शुरुआत हुई।

सीख

छोटी सी दया भी बड़े परिणाम ला सकती है।