Ramagya
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प्रह्लाद और होलिका

विष्णु

हिरण्यकशिपु एक बहुत शक्तिशाली राक्षस राजा था। उसे ब्रह्मा जी से वरदान मिला था कि उसे न कोई मनुष्य मार सकता है, न पशु, न दिन में, न रात में, न घर के अंदर, न बाहर। इस वरदान से वह बहुत घमंडी हो गया और चाहता था कि सब उसकी पूजा करें। लेकिन उसका अपना बेटा प्रह्लाद भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था। प्रह्लाद हर समय विष्णु का नाम लेता रहता था। हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को बहुत डराया, धमकाया, यहाँ तक कि मारने की कोशिश भी की। उसे पहाड़ से गिराया, साँपों के बीच रखा, हाथियों से कुचलवाया — लेकिन हर बार भगवान विष्णु ने प्रह्लाद की रक्षा की। अंत में हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका को बुलाया। होलिका को वरदान था कि आग उसे जला नहीं सकती। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई। लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहा और होलिका जल गई। इसी की याद में हम होली का त्योहार मनाते हैं। बाद में भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध किया।

सीख

सच्ची भक्ति और विश्वास के आगे बुराई कभी नहीं जीत सकती।