Ramagya
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राधा कृष्ण का प्रेम

कृष्ण

वृंदावन की गलियों में कृष्ण की बाँसुरी की मधुर धुन गूँजती थी। जब भी कृष्ण बाँसुरी बजाते, सारी गोपियाँ अपना काम छोड़कर उनके पास दौड़ी आतीं। लेकिन सबसे अधिक प्रेम राधा का था। राधा और कृष्ण का प्रेम इतना गहरा था कि लोग उनका नाम साथ में लेते थे — राधा-कृष्ण। राधा कृष्ण से उम्र में बड़ी थीं। वे बरसाने गाँव की थीं। कृष्ण जब भी बाँसुरी बजाते, राधा को लगता कि कृष्ण उन्हीं को बुला रहे हैं। दोनों यमुना किनारे मिलते, वृंदावन के कुंजों में साथ घूमते और रासलीला करते। उनका प्रेम सांसारिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक था — आत्मा का परमात्मा से मिलन। जब कृष्ण मथुरा जाने लगे तो राधा का हृदय टूट गया। लेकिन कृष्ण ने कहा कि वे हमेशा राधा के हृदय में रहेंगे। कृष्ण ने कहा कि सच्चा प्रेम दूरी से कम नहीं होता। राधा ने जीवन भर कृष्ण की भक्ति की। उनका प्रेम इतना पवित्र था कि आज भी कृष्ण के हर मंदिर में राधा का नाम पहले लिया जाता है। राधा-कृष्ण का प्रेम निस्वार्थ प्रेम और भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है।

सीख

सच्चा प्रेम निस्वार्थ होता है और कभी कम नहीं होता।