Ramagya
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राजा हरिश्चन्द्र

हरिश्चन्द्र

राजा हरिश्चन्द्र सत्य और धर्म के लिए प्रसिद्ध थे। एक बार देवताओं में बहस हुई कि क्या कोई मनुष्य हर परिस्थिति में सत्य बोल सकता है। ऋषि विश्वामित्र ने हरिश्चन्द्र की परीक्षा लेने का निश्चय किया। विश्वामित्र ने हरिश्चन्द्र से दक्षिणा में उनका पूरा राज्य माँग लिया। हरिश्चन्द्र ने बिना हिचकिचाहट दे दिया। फिर विश्वामित्र ने और दक्षिणा माँगी। हरिश्चन्द्र के पास कुछ नहीं बचा तो उन्होंने अपनी पत्नी शैव्या और पुत्र रोहिताश्व को बेच दिया। स्वयं को भी एक श्मशान के चांडाल को बेच दिया। हरिश्चन्द्र श्मशान में शवों को जलाने का काम करने लगे। एक रात उनका अपना पुत्र साँप के काटने से मर गया। शैव्या रोती हुई शव लेकर आई। हरिश्चन्द्र ने अपने ही पुत्र को पहचाना लेकिन बिना कर लिए शव जलाने से मना कर दिया क्योंकि यह उनका कर्तव्य था। तभी सभी देवता प्रकट हुए। विश्वामित्र ने कहा कि हरिश्चन्द्र ने सत्य की सबसे कठिन परीक्षा पास कर ली। सब कुछ वापस मिला और उनका पुत्र जीवित हो गया।

सीख

सत्य का मार्ग कठिन है, लेकिन अंत में सत्य की ही विजय होती है।