Ramagya
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समुद्र मंथन

विष्णु

बहुत पहले देवताओं और असुरों के बीच एक बड़ी लड़ाई चल रही थी। देवता कमज़ोर हो गए थे। भगवान विष्णु ने उन्हें सलाह दी कि समुद्र मंथन करो, उसमें से अमृत निकलेगा जिसे पीकर तुम अमर हो जाओगे। लेकिन यह काम इतना बड़ा था कि देवताओं को असुरों की मदद लेनी पड़ी। मंदराचल पर्वत को मथानी बनाया गया और वासुकि नाग को रस्सी। देवता एक तरफ और असुर दूसरी तरफ खड़े हुए। भगवान विष्णु ने कछुए का रूप लेकर पर्वत को अपनी पीठ पर सहारा दिया। मंथन शुरू हुआ। समुद्र से कई अद्भुत चीज़ें निकलीं — कामधेनु गाय, ऐरावत हाथी, कल्पवृक्ष, लक्ष्मी जी और भी बहुत कुछ। लेकिन सबसे पहले भयंकर हलाहल विष निकला जो पूरी दुनिया को नष्ट कर सकता था। भगवान शिव ने सबको बचाने के लिए वह विष पी लिया। पार्वती जी ने उनका गला दबाया ताकि विष नीचे न जाए। इसलिए शिव जी का गला नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। अंत में अमृत निकला और भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण करके देवताओं को अमृत पिलाया।

सीख

बड़े लक्ष्य को पाने के लिए मिलकर काम करना और कठिनाइयों का सामना करना ज़रूरी है।