Ramagya
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सरस्वती का ज्ञान

सरस्वती

सृष्टि के आरंभ में जब ब्रह्मा जी ने संसार बनाया तो चारों ओर अव्यवस्था थी। कोई भाषा नहीं थी, कोई संगीत नहीं था, कोई ज्ञान नहीं था। प्राणी एक-दूसरे से बात नहीं कर सकते थे। सब कुछ अस्त-व्यस्त और शांत था। तब ब्रह्मा जी ने अपनी शक्ति से देवी सरस्वती को प्रकट किया। सरस्वती श्वेत वस्त्र पहने, हाथ में वीणा लिए, कमल पर विराजमान थीं। उनके एक हाथ में पुस्तक थी और दूसरे में माला। जैसे ही सरस्वती ने अपनी वीणा के तार छेड़े, संसार में पहली बार ध्वनि गूँजी। उस दिव्य संगीत से नदियाँ बहने लगीं, पक्षी गाने लगे और हवा में मधुर स्वर भर गए। सरस्वती ने प्राणियों को भाषा दी ताकि वे अपने विचार व्यक्त कर सकें। उन्होंने लिपि दी ताकि ज्ञान लिखा जा सके। उन्होंने कला, संगीत और विज्ञान का वरदान दिया। इसीलिए सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाता है। बसंत पंचमी के दिन हम सरस्वती की पूजा करते हैं और नई चीज़ें सीखने का संकल्प लेते हैं।

सीख

ज्ञान सबसे बड़ा धन है — इसे बाँटने से यह बढ़ता है।