सती का बलिदान
शिव
सती भगवान शिव की पहली पत्नी और दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं। दक्ष को शिव पसंद नहीं थे क्योंकि शिव श्मशान में रहते थे, भस्म लगाते थे और साधारण वेशभूषा रखते थे। सती ने अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध शिव से विवाह किया था जिससे दक्ष और भी क्रोधित हो गए। एक बार दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया और सभी देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन जानबूझकर शिव और सती को नहीं बुलाया। सती को जब पता चला तो वे बहुत दुखी हुईं। शिव ने उन्हें जाने से मना किया, लेकिन सती ने कहा कि पिता के घर जाने के लिए निमंत्रण की आवश्यकता नहीं होती। सती यज्ञ स्थल पर पहुँचीं। वहाँ दक्ष ने सबके सामने शिव का अपमान किया। सती अपने पति के अपमान को सहन नहीं कर सकीं। उन्होंने कहा कि जिस शरीर ने दक्ष से जन्म लिया है, वह शरीर रखना उन्हें स्वीकार नहीं। सती ने यज्ञ की अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। जब शिव को पता चला तो उनका क्रोध प्रचंड हो गया। उन्होंने वीरभद्र को भेजकर दक्ष के यज्ञ का विनाश करवाया। बाद में सती ने पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया।
सीख
सम्मान और स्वाभिमान जीवन से भी अधिक मूल्यवान हैं।