Ramagya
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सावित्री और सत्यवान

सावित्री

राजकुमारी सावित्री ने वन में रहने वाले सत्यवान को अपना पति चुना। नारद मुनि ने चेतावनी दी कि सत्यवान की आयु केवल एक वर्ष शेष है। लेकिन सावित्री ने अपना निर्णय नहीं बदला और सत्यवान से विवाह कर लिया। एक वर्ष बाद नियत दिन आया। सत्यवान जंगल में लकड़ी काट रहा था कि अचानक उसे चक्कर आया और वह गिर पड़ा। यमराज स्वयं सत्यवान की आत्मा लेने आए। उन्होंने सत्यवान के शरीर से आत्मा निकाली और चल पड़े। सावित्री यमराज के पीछे-पीछे चलने लगी। यमराज ने कहा कि वापस जाओ, मृत्यु के बाद कोई नहीं आ सकता। लेकिन सावित्री ने हार नहीं मानी। उसने यमराज से बुद्धिमानी भरी बातें कीं। प्रसन्न होकर यमराज ने उसे तीन वरदान दिए — लेकिन सत्यवान का जीवन नहीं। सावित्री ने चतुराई से तीसरे वरदान में पुत्र प्राप्ति माँगी। यमराज समझ गए कि बिना सत्यवान के यह संभव नहीं। उन्होंने हँसकर सत्यवान की आत्मा लौटा दी। सावित्री की बुद्धि और प्रेम ने मृत्यु को भी हरा दिया।

सीख

सच्चा प्रेम और बुद्धिमानी से मृत्यु को भी जीता जा सकता है।