Ramagya
🫐

शबरी के बेर

राम

शबरी एक बूढ़ी आदिवासी महिला थी जो जंगल में अकेली रहती थी। उसके गुरु मतंग ऋषि ने मरने से पहले कहा था कि एक दिन भगवान राम तुम्हारे पास आएँगे। उस दिन से शबरी हर रोज़ अपनी कुटिया साफ करती, फूलों से सजाती और राम के आने का इंतज़ार करती। कई साल बीत गए लेकिन शबरी की आस्था कम नहीं हुई। वह रोज़ जंगल से ताज़े बेर तोड़कर लाती। हर बेर को पहले चखकर देखती कि कहीं खट्टा तो नहीं है। मीठे बेर अलग रखती और खट्टे फेंक देती ताकि राम को केवल मीठे बेर मिलें। एक दिन सचमुच भगवान राम और लक्ष्मण शबरी की कुटिया पहुँचे। शबरी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने काँपते हाथों से राम को जूठे बेर खिलाए। लक्ष्मण ने देखा कि बेर जूठे हैं, लेकिन राम ने बड़े प्रेम से हर बेर खाया और कहा कि इतने मीठे बेर उन्होंने कभी नहीं खाए। राम ने कहा कि भक्ति में जाति, धन या रूप नहीं देखा जाता — केवल प्रेम और समर्पण देखा जाता है।

सीख

सच्ची भक्ति में प्रेम और विश्वास ही सबसे महत्वपूर्ण है।