शिव पार्वती विवाह
शिव
भगवान शिव की पहली पत्नी सती के आत्मदाह के बाद शिव गहरे ध्यान में चले गए। उन्होंने संसार से मुँह मोड़ लिया। सती ने पर्वतराज हिमालय के घर पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया। पार्वती बचपन से ही शिव से प्रेम करती थीं और उन्हें पति के रूप में पाना चाहती थीं। पार्वती ने शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या शुरू की। उन्होंने सर्दी, गर्मी और बारिश सहते हुए वर्षों तक तप किया। देवताओं ने कामदेव को शिव का ध्यान भंग करने भेजा। कामदेव ने प्रेम का बाण चलाया, लेकिन शिव ने क्रोधित होकर अपनी तीसरी आँख खोली और कामदेव को भस्म कर दिया। फिर भी पार्वती ने हार नहीं मानी। उनकी तपस्या इतनी शक्तिशाली थी कि अंततः शिव प्रसन्न हुए। शिव ने पार्वती की परीक्षा ली — एक बूढ़े ब्राह्मण के रूप में आकर शिव की बुराई की। लेकिन पार्वती ने शिव के प्रति अपनी अटूट भक्ति दिखाई। शिव ने प्रसन्न होकर विवाह स्वीकार किया। उनका विवाह बड़ी धूमधाम से हुआ। सभी देवता, ऋषि और गण उपस्थित थे। शिव बारात में नंदी पर सवार होकर आए और पूरा ब्रह्मांड खुशी से झूम उठा।
सीख
सच्चे प्रेम और दृढ़ संकल्प के आगे हर बाधा झुक जाती है।