सीता स्वयंवर
राम
मिथिला के राजा जनक की पुत्री सीता अत्यंत सुंदर और गुणवान थीं। राजा जनक के पास भगवान शिव का एक विशाल धनुष था जिसे पिनाक कहते थे। राजा जनक ने प्रतिज्ञा की कि जो भी वीर इस धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में दूर-दूर से अनेक राजा और राजकुमार आए। एक-एक करके सभी ने धनुष उठाने का प्रयास किया, परंतु कोई भी उसे हिला तक नहीं सका। रावण जैसे बलशाली राजा भी असफल रहे। सभा में निराशा छा गई। तभी गुरु विश्वामित्र के साथ युवा राम और लक्ष्मण आए। विश्वामित्र ने राम से धनुष उठाने को कहा। राम ने श्रद्धापूर्वक धनुष को प्रणाम किया और सहजता से उठा लिया। जब उन्होंने प्रत्यंचा चढ़ाई तो धनुष इतने बल से झुका कि वह टूट गया। उसकी ध्वनि से तीनों लोक काँप उठे। सीता ने प्रसन्नतापूर्वक राम के गले में जयमाला डाल दी। इस प्रकार राम और सीता का दिव्य विवाह संपन्न हुआ और सारी मिथिला नगरी खुशियों से झूम उठी।
सीख
सच्ची योग्यता शांत स्वभाव और विनम्रता में छिपी होती है।