प्यासा कौआ
पंचतंत्र
गर्मी का मौसम था। एक कौआ बहुत प्यासा था। वह पानी की तलाश में इधर-उधर उड़ रहा था। नदियाँ सूख गई थीं, तालाब खाली थे। कौआ थककर एक पेड़ पर बैठ गया। तभी उसकी नज़र एक घड़े पर पड़ी। कौआ खुश होकर घड़े के पास गया। लेकिन घड़े में पानी बहुत कम था और घड़ा गहरा था। कौए की चोंच पानी तक नहीं पहुँच पा रही थी। उसने घड़ा गिराने की कोशिश की लेकिन वह बहुत भारी था। कौआ निराश हो गया। तभी कौए को एक तरकीब सूझी। उसने पास में पड़े छोटे-छोटे कंकड़ उठाए और एक-एक करके घड़े में डालने लगा। हर कंकड़ के साथ पानी थोड़ा ऊपर आता गया। कौआ लगातार कंकड़ डालता रहा। धीरे-धीरे पानी इतना ऊपर आ गया कि कौए की चोंच तक पहुँच गया। कौए ने खुशी-खुशी पानी पिया और अपनी प्यास बुझाई। उसकी बुद्धिमानी और धैर्य ने उसकी जान बचा ली।
सीख
बुद्धि और धैर्य से हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।