वामन अवतार
विष्णु
राजा बलि एक बहुत शक्तिशाली और दानवीर असुर राजा था। उसने अपनी शक्ति से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। देवता अपना स्वर्ग खो बैठे और विष्णु से सहायता माँगी। भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया — एक छोटे ब्राह्मण बालक का रूप। वामन राजा बलि के यज्ञ में पहुँचे। बलि ने पूछा कि ब्राह्मण देव, आपको क्या चाहिए। वामन ने विनम्रता से कहा कि मुझे केवल तीन पग भूमि चाहिए। बलि के गुरु शुक्राचार्य ने पहचान लिया कि यह विष्णु हैं और बलि को मना किया। लेकिन दानवीर बलि ने कहा कि दान का वचन तोड़ना पाप है। जैसे ही बलि ने जल छोड़कर दान दिया, वामन ने विराट रूप धारण किया। एक पग में पूरी पृथ्वी नाप ली, दूसरे पग में संपूर्ण आकाश। फिर पूछा कि तीसरा पग कहाँ रखूँ। बलि ने अपना सिर आगे कर दिया और कहा कि मेरे सिर पर रख दीजिए। विष्णु बलि की दानवीरता से प्रसन्न हुए। उन्होंने बलि को पाताल लोक का राजा बनाया और वरदान दिया कि एक दिन वह इंद्र बनेगा।
सीख
सच्चा दानवीर अपना वचन कभी नहीं तोड़ता।