Ramagya
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वराह अवतार

विष्णु

हिरण्याक्ष नामक एक शक्तिशाली राक्षस ने पृथ्वी को उठाकर समुद्र की गहराइयों में छिपा दिया। वह इतना बलवान था कि कोई भी देवता उससे लड़ने का साहस नहीं कर पाता था। पृथ्वी के बिना सारी सृष्टि अस्त-व्यस्त हो गई। सभी प्राणी कष्ट में थे। देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता माँगी। विष्णु ने वराह का रूप धारण किया — एक विशाल दिव्य सूअर जिसका शरीर पर्वत जैसा विशाल था। वराह भगवान ने समुद्र में गोता लगाया और गहराइयों में पृथ्वी को खोजा। समुद्र की तलहटी में हिरण्याक्ष ने वराह भगवान को रोका। दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ जो हज़ार वर्षों तक चला। हिरण्याक्ष ने अपनी सारी माया और शक्ति लगा दी, लेकिन वराह भगवान के सामने वह टिक नहीं सका। अंत में वराह भगवान ने हिरण्याक्ष का वध किया। फिर उन्होंने अपने विशाल दाँतों पर पृथ्वी को उठाया और उसे वापस उसके स्थान पर स्थापित किया। सृष्टि फिर से व्यवस्थित हो गई।

सीख

धरती और प्रकृति की रक्षा करना हम सबका कर्तव्य है।