विक्रम और बेताल
विक्रमादित्य
राजा विक्रमादित्य बहुत न्यायप्रिय और साहसी राजा थे। एक तांत्रिक ने उनसे कहा कि श्मशान के पेड़ पर एक बेताल (एक प्रेत) लटका है, उसे लाकर दो। विक्रम ने यह चुनौती स्वीकार की। विक्रम अँधेरी रात में श्मशान गए। पेड़ पर उल्टा लटके बेताल को उतारकर कंधे पर रखा। बेताल ने शर्त रखी कि वह रास्ते में एक कहानी सुनाएगा और अंत में एक प्रश्न पूछेगा। अगर विक्रम को उत्तर पता हो और न बोले तो उसका सिर फट जाएगा। लेकिन अगर विक्रम बोलेगा तो बेताल वापस पेड़ पर उड़ जाएगा। बेताल ने एक रोचक कहानी सुनाई और कठिन प्रश्न पूछा। विक्रम को उत्तर पता था इसलिए उन्हें बोलना पड़ा। बेताल उड़कर वापस पेड़ पर चला गया। विक्रम फिर गए, फिर बेताल को लाए, फिर कहानी, फिर प्रश्न। यह क्रम पच्चीस बार चला। हर बार बेताल ने नई कहानी सुनाई जिसमें धर्म, न्याय और बुद्धि की परीक्षा थी। अंत में पच्चीसवीं कहानी में विक्रम ने चुप रहकर बेताल को सफलतापूर्वक ले गए।
सीख
धैर्य और दृढ़ता से हर चुनौती पर विजय पाई जा सकती है।