Ramagya
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एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु · प्रत्येक एकादशी

कथा

सतयुग में मुर नामक एक भयंकर दैत्य था जिसने तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था। देवता भगवान विष्णु की शरण में गए। विष्णु जी ने मुर दैत्य से युद्ध किया। लम्बे युद्ध के बाद भगवान विष्णु एक गुफा में विश्राम करने लगे। मुर दैत्य ने सोचा कि यही अवसर है और वह विष्णु जी को मारने गुफा में घुसा। उसी समय भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई। उस कन्या ने अपने तेज से मुर दैत्य का वध कर दिया। जब विष्णु जी जागे तो उन्होंने उस कन्या से प्रसन्न होकर पूछा कि तुम कौन हो और क्या वरदान चाहती हो। कन्या ने कहा कि मैं आपकी शक्ति से उत्पन्न हुई हूँ। मुझे यह वरदान दें कि जो इस दिन व्रत रखे उसके सभी पाप नष्ट हों। भगवान विष्णु ने कहा कि तुम एकादशी के नाम से जानी जाओगी क्योंकि तुम ग्यारहवीं तिथि को प्रकट हुई हो। जो मनुष्य एकादशी का व्रत रखेगा उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी और उसके सभी पाप नष्ट होंगे। तभी से प्रत्येक मास की दोनों एकादशियों को भगवान विष्णु की पूजा के साथ व्रत रखा जाता है।

पूजा विधि

एकादशी के दिन अन्न का त्याग करें। फलाहार या निर्जला व्रत रखें। भगवान विष्णु की पूजा करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। रात भर जागकर भजन करें। द्वादशी को पारण करें।

महत्व

एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। यह पापों के नाश, मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ व्रत माना जाता है।