Ramagya
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गुरुवार व्रत कथा

बृहस्पति देव · प्रत्येक गुरुवार

कथा

प्राचीन काल में एक बहुत धनी राजा था। वह प्रत्येक गुरुवार को व्रत रखता और गरीबों को दान देता था। उसकी रानी को यह पसंद नहीं था। रानी न व्रत रखती थी और न दान करती थी। एक दिन बृहस्पति देव साधु के वेश में राजा के द्वार पर आए। राजा दरबार में था तो रानी से भिक्षा माँगी। रानी ने कहा कि मैं इस दान-पुण्य से थक गई हूँ, कोई ऐसा उपाय बताओ जिससे सारा धन नष्ट हो जाए। बृहस्पति देव ने कहा कि गुरुवार को घर लीपो, बाल धोओ, कपड़े धोओ और मांस-मदिरा का सेवन करो तो धन नष्ट हो जाएगा। रानी ने ऐसा ही किया। कुछ ही समय में राजा का सारा धन नष्ट हो गया। राजा दरिद्र हो गया। सात पुत्र थे, सब मरने लगे। राजा ने रानी से पूछा तो उसने सब बता दिया। राजा ने फिर से गुरुवार का व्रत रखना शुरू किया। चने की दाल और गुड़ से बृहस्पति देव की पूजा की। पीले वस्त्र पहने और केले के पेड़ की पूजा की। बृहस्पति देव प्रसन्न हुए और राजा को पहले से भी अधिक धन-सम्पत्ति प्रदान की। राजा के पुत्र भी स्वस्थ हो गए। तभी से गुरुवार का व्रत धन-समृद्धि और ज्ञान प्राप्ति के लिए रखा जाता है।

पूजा विधि

गुरुवार को व्रत रखें। पीले वस्त्र पहनें। चने की दाल, गुड़, केला और पीले फूल से बृहस्पति देव की पूजा करें। केले के पेड़ की पूजा करें। कथा सुनें और शाम को व्रत खोलें।

महत्व

गुरुवार का व्रत बृहस्पति देव को समर्पित है। यह धन-समृद्धि, ज्ञान प्राप्ति और वैवाहिक सुख के लिए रखा जाता है।